जूनागढ़ (Junagadh), पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात का एक शहर है, जो सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। जूनागढ़ नाम का शाब्दिक अर्थ है “पुराना किला”, जो सही भी है क्योंकि इसकी पहचान का एक बड़ा हिस्सा इसके लंबे इतिहास में समाया हुआ है।
भारत के इतिहास में जूनागढ़ (Junagadh) एक महत्वपूर्ण स्थान है और साथ में यह एक घूमने लायक बेस्ट प्लेस है। जूनागढ़ में स्थित गिरनार पर्वत एक पवित्र पर्वत है और गुजरात भर से एवं भारत से बहुत सारे टूरिस्ट यहां घूमने आते हैं।

गिरनार पर्वत की तलहटी में बसे जूनागढ़ पर कई राजवंशों—मौर्य, चूड़ास्मा, मुस्लिम नवाबों, आदि—ने शासन किया है और प्रत्येक ने अपनी वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और संस्कृति में अपनी अलग छाप छोड़ी है।
भौगोलिक दृष्टि से देखे तो जूनागढ़ शहर के पास में ही गिरनार पहाड़ियाँ हैं, जो धार्मिक तीर्थयात्रा और ट्रैकिंग के अवसर प्रदान करती हैं; बावड़ियाँ, गुफाएँ, पुराने किले; पास में वाइल्डलाइफ एरिया; और एक ऐसा खुशनुमा वातावरण जो शहरी हलचल और आध्यात्मिक शांति, दोनों का मिश्रण है।
यहाँ की क्लाइमेट गुजरात के अनुरूप है, जिसमें गर्मियां बेहद गर्म, अति मानसूनी वर्षा और सर्दियाँ भी खूब होती हैं।
जूनागढ़ सांस्कृतिक मेलजोल का भी एक केंद्र है। यहाँ हिंदू मंदिर, जैन मंदिर, प्राचीन बौद्ध गुफाएँ, मस्जिदें, मकबरे और तीर्थस्थल हैं। यहाँ के त्यौहार धूमधाम से मनाए जाते हैं और आध्यात्मिक होते हैं, जो अक्सर गिरनार परिक्रमा और भवनाथ मेले जैसे मेलों से जुड़े होते हैं।
बेस्ट प्लेसेज टू विजिट इन जूनागढ़ (Beautiful places to visit in Junagadh)
यदि आप जूनागढ़ के टूर पर जा रहे हैं, तो आप इतिहास, आध्यात्मिकता, प्रकृति, वन्य जीवन, स्थानीय जीवन, भोजन, बाजार – सभी का एक ही स्थान पर मिश्रण देख सकते हैं।
गिरनार सहित जूनागढ़ जिले में बहुत सारे खूबसूरत और प्राकृतिक सौंदर्य भरपूर जगहें हैं जिसे आपको जरूर विजिट करना चाहिए। चलिए जूनागढ़ को एक्सप्लोर करते हैं।
ऊपरकोट किला (Uparkot)

ऊपरकोट जूनागढ़ के सबसे फेमस स्थलों में से एक हैं और यहां पर हर कोई टूरिस्ट घूमने जाता है। ऊपरकोट प्राचीन है और बहुत बड़ा है। इसका एक हिस्सा मौर्य काल के समय का है।
किले के परिसर में बौद्ध गुफाएँ, बावड़ियाँ, पुरानी खाइयाँ, प्राचीर आदि हैं। ऊपरकोट में घूमने से जूनागढ़ की प्राचीनता और उसकी रणनीतिक स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
ऊपरकोट से गिरनार पर्वत का भी बेहद खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। यहां पर अड़ी कड़ी वाव, नवघन कुआं, अनाज के स्टोरेज की जगह आदि देखने लायक हैं।
समय: यह किला बहुत बड़ा है इसीलिए इसे अच्छी तरह से घूमने के लिए 2-3 घंटे का समय लेकर जरूर जाएं।
समर में अधिक गर्मी होती है इसीलिए गर्मी से बचने के लिए सुबह जल्दी जाएँ; और पानी साथ रखें। हालांकि यहां पर छोटे छोटे स्टॉल बने हुए हैं जहां पर आपको पानी, लिंब शरबत आदि मिल जाता है।
अड़ी कड़ी वाव और नवघन कुआं (Adi Kadi Vav and Navghan Kuva)
यह दोनों ऊपरकोट के पास स्थित प्राचीन बावड़ियाँ हैं। एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई यह सीढ़ियों वाले कुएं पुराने समय का पानी का स्रोत था।
गुजरात में कहावत है कि “અડી કડી વાવ અને નવઘણ કૂવો જેણે નથી જોયો તે જીવતો મુઓ” यानी कि जिसने नवघन कुआं नहीं देखा वह जीते ही मुआ।
अड़ी कड़ी वाव के पीछे भी कुछ दिलचस्प कहानियां हैं। यह वाव 126 फुट गहरी है जहां तक पहुंचने के लिए 166 सीढ़ियां पत्थर को काटकर बनाई गई है।
नवघन कुएं तक पहुंचने के लिए भी 200 के आसपास सीढ़ियां चट्टान को काटकर बनाई गई है। हवा और रोशनी के लिए पहाड़ में बड़े छेद भी बनाए गए हैं। यह कुआं गोल न होकर चोरस बनाया गया है।
महाबत मकबरा (Mahabat Maqbara)

महाबत मकबरा जूनागढ़ रेलवे स्टेशन से सिर्फ आधे किलोमीटर दूर है और वास्तुकला और फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए एक पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट है।
गोथिक डिजाइन के साथ इंडो-इस्लामिक वास्तुकला वाला एक खूबसूरत मकबरा है। इसकी अलंकृत मीनारें, गुंबद और बारीक जालीदार काम इसे बेहद फोटोजेनिक बनाते हैं। वास्तुकला और फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए यह एक बेस्ट जगह है।
जूनागढ़ म्यूजियम (Junagadh Museum)

दरबार हॉल म्यूजियम नाम से प्रख्यात जूनागढ़ के इस म्यूजियम में 19वीं शताब्दी के शस्त्र, कपड़े, पेंटिंग्स और राजा के जमाने की 3000 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित किए गई हैं।
यह म्यूजियम 1964 में स्थापित किया गया था। इससे पहले यह एक महल था और कोर्ट रूम की तरह राजाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। अगर आपके पास समय हो तो यह इतिहास में डुबकी लगाने लायक यह बेहतरीन जगह है।
अशोक का शिलालेख (Ashok Rock Edicts)

जूनागढ़ में भवनाथ जाते समय रास्ते में ही अशोक का शिलालेख आता है। 3वी शताब्दी में अशोक के उपदेशों को शिलालेख पर अंकित किया गया था। यह पत्थर अभी भी यहां पर है।
बौद्ध इतिहास को दर्शाता यह शिलालेख को देखने एकबार जरूर जाना चाहिए।
गिरनार (Girnar hill)

जूनागढ़ और पूरे सौराष्ट्रवासियों एवं गुजरात की आन बान और शान गिरनार पर्वत है। गुजरातियों के लिए गिरनार पर्वत एक पवित्र स्थान है।
इस गिरनार में कई सारे मंदिर हैं जिसमें अम्बे मां, और दत्तात्रेय भगवान मुख्य है। यहां पर जैन लोगों का पवित्र स्थान नेमीनाथ भगवान का भी मंदिर है। इसके अलावा यहां पर बहुत सारे आश्रम भी हैं।
दिवाली के बाद एकादशी या देव दिवाली के समय यहां पर गिरनार परिक्रमा का भी आयोजन होता है। जिसमें लाखों लोग पूरे गिरनार पर्वत की परिक्रमा करते हैं और इसमें 3 से 4 दिन का समय लगता है। इस परिक्रमा के दौरान यहां का माहौल कुछ अलग ही होता है। हर सौराष्ट्रवासी यह चाहता है कि अपने जीवन में एक बार वह गिरनार परिक्रमा जरूर करें।
गिरनार उड़न खटोला (Girnar Ropeway)

गिरनार के टॉप पर पहुंचने के आपको 9999 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और हिन्दुओं के पवित्र स्थान अम्बा माता के मंदिर तक जाने के लिए 5000 सीढ़ियां चढ़ती पड़ती हैं जो बहुत सारे लोगों के मुश्किल होता है। लेकिन सन् 2020 में शुरू हुई उड़न खटोला की वजह से माता के दर्शन करना बहुत आसान हो गया है।
गिरनार का उड़न खटोला 7600 फिट लंबा है और अद्यतन टेक्नोलॉजी वाला है। इसकी मदद से आप अम्बे मां के मंदिर तक 15 मिनिट में पहुंच जाते हैं।
गिरनार उड़न खटोला की बुकिंग ऑनलाइन (udankhatola.com) और ऑफलाइन दोनों तरीके से होती है। ऑनलाइन बुकिंग करके ही जाना चाहिए क्योंकि ऑफलाइन बुकिंग में लंबी लाइन होती है। एक व्यक्ति की रिटर्न टिकट 700 रुपए है।
दामोदर कुंड (Damodar Kund)

गुजराती में एक सुंदर भक्तिमय गीत है “जूनागढ़ जावू के दामो कुंड नावू, हाल तने हाल सौराष्ट्र बतावू”। इस गीत में दामोदर कुंड की महिमा का गान किया गया है।
दामोदर कुंड के पीछे बहुत सारी कथाएं हैं। भगवान ब्रह्मा ने यज्ञ द्वारा बनाया होने के कारण पुराने समय में इसे ब्रह्म कुंड भी कहा जाता है।
गुजरात के लोगों के लिए दामोदर कुंड एक पवित्र क्षेत्र है। जैसे गंगा लोगों नहाकर पवित्र होने जाते हैं वैसे ही लोग भक्ति और श्रद्धा से दामोदर कुंड में नहाने आते हैं और यहां लोग अंतिम संस्कार के बाद अपने स्वजन की अस्थियां भी विसजिर्त करते हैं। कहते हैं कि दामोदर कुंड विसर्जित की गई अस्थियां जल बन जाती हैं।
दामोदर कुंड के सामने ही राधा दामोदर का पुराना और ऐतिहासिक मंदिर है जिसके दर्शन हेतु जरूर जाना चाहिए। कहा जाता है कि भगवान् श्रीकृष्ण की अस्थियों का विसर्जन उनके बेटे ने इसी दामोदर कुंड में किया था।
भवनाथ मंदिर (Bhavnath Temple)

गिरनार की तलेटी में बसा भगवान शिवजी का यह मंदिर लाखों लोगों के लिए एक श्रद्धा स्थान है। पुराणों में भी इस मंदिर का वर्णन है।
स्कन्दपुराण के अनुसार एकबार भगवान शिवजी माता पार्वती से रूठकर अंतर्ध्यान हो गए। शिवजी को पाने के पार्वती मां ने बहुत कोशिश की। सभी देवताओं की भी मदद ली। लेकिन कोई उपाय न मिलने की वजह से अंत में नारद जी सलाह लेने के बाद माता पार्वती ने रेवतांचल पर्वत जिसे आज गिरनार कहा जाता है वहां पर तप और साधना की।
उनसे प्रसन्न होकर शिवजी ने अपना मृग वस्त्र फेंका और जहां यह गिरा वहां पर मंदिर का नाम वस्त्रापथेश्वर महादेव रखा गया। और साधना करने पर भगवान शिवजी प्रसन्न हुए और लिंग स्वरूप में भवेश्वर मंदिर में स्थापित हुए। अब यह मंदिर भवनाथ मंदिर से जाना जाता है।
लोग श्रद्धा से यहां दर्शन करने आते हैं और महाशिवरात्रि के दिन यहां पर बहुत बड़ा मेला भी लगता है।
इस मंदिर के पास पवित्र मृगी कुंड भी है जिसका भी रोचक इतिहास है। महाशिवरात्रि के दिन हजारों नागा साधु यहां पर स्नान करने आते हैं और कहा जाता है कि भगवान शिव भी उनके स्वरूप में स्नान करने आते हैं।
शक्करबाग प्राणीसंग्रहालय (Sakkarbaug Zoological Garden)

जुनागढ़ जू जो शक्करबाग प्राणीसंग्रहालय से मशहूर हैं वह बहुत बड़ा और पुराना है। इसकी एंट्री फि 40 प्रति व्यक्ति है और पूरा जू घूमने के लिए बस, जिप्सी और इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट की सुविधा भी उपलब्ध है लेकिन उसका चार्ज अलग से देना पड़ता है।
यहां पर 700 से अधिक प्राणियों और 800 से अधिक पक्षियों को रखा गया है। इसमें कुछ विदेशी प्राणी भी हैं। बच्चों को यहां बहुत मज़ा आता है। बच्चों को खेलने की भी जगह यहां पर है। जुनागढ़ प्राणीसंग्रहालय की मुलाकात आपको जरूर लेनी चाहिए।
सूरज फन वर्ल्ड (Suraj Fun World)
जूनागढ़ में सूरज फन वर्ल्ड एक बहुत ही अच्छा एम्यूजमेंट और एडवेंचर पार्क है। यहां पर आपको तरह तरह की राइड्स एंजॉय करने को मिल जाएगी।
बच्चों को यहां पर बहुत मज़ा आता है। आप भी राइड्स के शौकीन है तो इस एम्यूजमेंट पार्क में जरूर जाना चाहिए।
वेलिंग्टन डैम (Wellington Dam)

1936 में वेलिंग्टन डैम को बनाया गया था। दातार हिल्स के बेस यह डैम का परिसर मन को मोह लेने वाली कुदरती सौंदर्य और हरे भरे पहाड़ों से गिरा हुआ है।
जूनागढ़ के पीने के पानी का बहुत बड़ा स्त्रोत वेलिंग्टन डैम था। यहां पर बंदर भी बहुत होते है।
जामा मस्जिद (Jama Masjid)

जामा मस्जिद कोई जुम्मा मस्जिद भी कहते हैं। यह खूबसूरत और शांत जगह मुस्लिम समाज का श्रद्धा केंद्र है। महाबत मकबरा और जामा मस्जिद दोनों पास पास में ही है।
सखी दातार (Datar Hills)

दातार हिल्स पर स्थित सखी दातार दरगाह है जो जमील शाह दातार बापू की दरगाह है और हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों समाज के लोग श्रद्धा से यहां आते हैं।
मेरी मानो तो सखी दातार की विजिट आपको जरूरी करनी चाहिए क्योंकि यह जगह कुदरती सौंदर्य से भरपूर है। टॉप पर पहुंचने के लिए आपको 3000 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ेगी। लेकिन टॉप पर पहुंचने के बाद आपको सुंदर पहाड़ियों का जो नजारा देखने को मिलेगा वह लाजवाब होगा।
बारिश के मौसम में यहां की खूबसूरती और बढ़ जाती है और मन को मोहित कर देती है।
जटाशंकर महादेव मंदिर और वॉटरफॉल (Jatashankar Mahadev Temple and waterfall)
घने जंगल के बीच स्थित जटाशंकर महादेव का मंदिर श्रद्धालुओं और प्रवासियों के लिए एक बेहद ही खूबसूरत और एडवेंचरस जगह है। गिरनार में रोपवे के साइड में से इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता निकलता है।
शुरुआत में थोड़ी सीढ़ियां और फिर पथरीला जंगल का रास्ता, ऐसे थोड़ा एडवेंचर ट्रैक करते हुए आप मंदिर तक पहुंच जाएंगे।
जटाशंकर महादेवजी के दर्शन करके थोड़ा आगे ट्रैक करके आप जटाशंकर वॉटरफॉल तक पहुंच जाएंगे। यहां पर नहाने खूब आनंद लीजिए। मंदिर तक पहुंचने के रस्ते में भी आपको बहुत सारे छोटे छोटे वॉटरफॉल मिल जाते हैं और ऐसे वाटरफॉल्स की भी मस्ती ले सकते हो। ऐसे वाटरफॉल्स सिर्फ बारिश के मौसम में ही एक्टिव रहते हैं।
जुनागढ़ कैसे घूमे (Junagadh Itinerary)

जुनागढ़ अच्छी तरह से घूमने के लिए आपको दो से तीन दिन चाहिए। इन दिनों में आप जूनागढ़ कुछ इस तरह से घूम सकते हो।
Day 1: जूनागढ़ पहुंचने के बाद पहले दिन आप ऊपरकोट घूम लीजिए जिसमें पूरा किला, अड़ी कड़ी वाव, नवघन कुआं आदि घूमने लायक है।
ऊपरकोट के बाद जुनागढ़ म्यूजियम, महाबत मकबरा, जामा मस्जिद और शक्करबाग झू घूमकर शाम को डिनर के बाद लोकल मार्केट चले जाइए।
Day 2: दूसरे दिन आप गिरनार घूमने चले जाइए। जिसमें आप रास्ते में अशोक शिलालेख, भवनाथ मंदिर देखेंगे और बाद में गिरनार चढ़ेंगे। गिरनार में आप उड़न खटोला की मदद से भी पहुंच सकते हैं।
साथ में आप दामोदर कुंड और राधा दामोदर मंदिर में दर्शन कर लीजिए।
Day 3: तीसरे दिन आप सखी दातार में घूमने चले जाइए। सखी दातार के बाद वेलिंग्टन डैम घूम लीजिए।
दोपहर के बाद आप जटाशंकर वॉटरफॉल और महादेव के दर्शन के लिए जा सकते हैं। और अधिक समय बचता है तो सूरज फन वर्ल्ड में भी बच्चों के साथ जा सकते हैं।
जुनागढ़ में कहा रुके (Best hotels in Junagadh)
आपके बजट, आपके ठहरने की जगह, सेंटर से दूरी या शांत वातावरण के आधार पर, जूनागढ़ में कई विकल्प उपलब्ध हैं। यहाँ बजट कैटेगरी के अनुसार कई विकल्प दिए गए हैं, साथ ही उदाहरण, अनुमानित मूल्य सीमा और क्या उम्मीद की जा सकती है, इसकी जानकारी भी दी गई है। यहां पर दी गई जानकारी में ध्यान देने वाली बात यह है कि होटल की कीमतें अनुमानित हैं और सीजन के अनुसार बदलती रहती हैं, इसलिए हमेशा वर्तमान दरें और उपलब्धता की जांच अवश्य करें।
जुनागढ़ में बजट स्टे (Budget stay)
जुनागढ़ में बहुत सारी ऐसी ठहरने की जगह है जो अकेले यात्रियों, तीर्थयात्रियों, बैकपैकर्स या किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए उपयुक्त हैं, जिसे लक्जरी स्टे की आवश्यकता नहीं है, लेकिन स्वच्छ, सुरक्षित, बुनियादी सुविधाएं चाहिए।
ऐसे स्टे में धर्मशालाएं, गेस्ट हाउस और बेसिक होटल शामिल हैं जो रेलवे स्टेशन, भवनाथ तलेटी या बस स्टैंड के नजदीक मिल जाएगी।
ऐसे होटल के उदाहरण क्लिक होटल, इंद्रलोक होटल, लोटस होटल आदि है जिसका किराया 500 रुपए प्रति नाइट से शुरू होता है।
जूनागढ़ में कुछ ऐसी धर्मशाला है और आश्रम भी है जिसमें बहुत मामूली किराया होता है या किसी आश्रम में फ्री स्टे भी होता है जहां पर आप कुछ दान-भेट भी कर सकते हैं।
जुनागढ़ में लक्जरी होटल्स और रिसॉर्ट (Junagadh luxury hotel and resort)
बेस्ट लक्जरी और आरामदायक स्टे चाहने वाले यात्रियों के लिए जुनागढ़ में कुछ ऐसे लग्जरी होटल्स और रिसॉर्ट भी हैं जिसमें अधिक स्पेस, लक्जरी फील, अच्छी सर्विस, और अधिक सुविधाएं अवेलेबल होती है।
ऐसे रिसॉर्ट और होटल्स की प्रति नाइट कॉस्ट मिनिमम 4000 रुपए से शुरू होती है। इसके कुछ उदाहरण द फर्न लियो रिसॉर्ट एंड क्लब जुनागढ़ (The Fern Leo Resort and Club Junagadh), द ग्रीनलैंड होटल, बाइक सूरज क्लब (Byke Suraj Club), बेलेव्यू सरोवर प्रीमियर जूनागढ़(Bellevue Sarovar Premier Junagadh), होटल आसोपालव, आदि शामिल हैं।
याद रखें कि इन सभी होटल्स में मिलने वाली लक्जरी सुविधाएं अलग अलग होती हैं और उसी तरह क़ीमत भी ऊपर नीचे हो सकती हैं।
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जुनागढ़ का टूर यूनिक क्यों है (Why your Junagadh tour is unique)
जुनागढ़ में आपको इतिहास साझा होता देख सकते हैं। ईसा पूर्व तीसरी सदी से लेकर मध्यकालीन इतिहास का अनुभव जुनागढ़ आपको कराता है।
जुनागढ़ में आपको धार्मिक डायवर्सिटी का अनुभव होगा। यहां पर हिंदू, जैन, बौद्ध एवं मुस्लिम धर्म के तीर्थ स्थलों की मुलाकात हो जाएगी। गिरनार परिक्रमा यहां पर सबसे पवित्र मानी जाती है।
जुनागढ़ का गिरनार आपको प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर आनंद देगा। यहां पर ट्रेकिंग के लिए नेचुरल ट्रेल्स है, पहाड़ है, गार्डन है, स्टेप वेल्स है, तालाब है, डैम है। यह सब आपके मन को मोह लेगे।
जुनागढ़ के नजदीक आपको गिर नेशनल पार्क में एशियाटिक लायन देखने को मिलेगा। वाइल्डलाइफ का अनुभव लेने वाले के लिए जुनागढ़ का टूर बेस्ट है।
जुनागढ़ शहर सिर्फ टूरिज्म के लिए नहीं है। यहां के लोकल लाइफ का अनुभव भी आपको लेना चाहिए जिसमें यहां का लोकल खाना, मार्केट, जीवन जीने की शैली भी शामिल है।
इन सभी वज़ह से आपका जूनागढ़ का टूर यूनिक और यादगार बन जाएगा।
जुनागढ़ कैसे पहुंचे (How to reach Junagadh)

जुनागढ़ से नजदीकी एयरपोर्ट राजकोट है जो 106 किलोमीटर दूर है। राजकोट एयरपोर्ट पर भारत के बड़े शहरों से रेगुलर फ्लाइट लैंड होती है। इसके अलावा मेजर एयरपोर्ट अहमदाबाद का है।
जुनागढ़ आप रोड के जरिए आसानी से पहुंच सकते हो। राजकोट, भावनगर, अमरेली, अमदाबाद एवं बहुत छोटे शहरों से भी रेगुलर प्राइवेट और सरकारी बस सर्विस आपको आसानी से मिल जाएगी।
इसके अलावा आप अपनी पर्सनल कार या रेट की कार लेकर भी राजकोट पहुंच सकते हैं।
जुनागढ़ पहुंचने का एक और विकल्प ट्रेन भी है। जुनागढ़ रेलवे स्टेशन पर मुंबई जैसे शहरों से भी रेगुलर ट्रेनें चलती हैं।
जुनागढ़ के नजदीकी टूरिस्ट प्लेसेज का अंतर (Distance from Junagadh)
जुनागढ़ घूमने का प्लान बनाया है जो इसके आसपास सौराष्ट्र के कुछ बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी आपको कवर करना चाहिए।
द्वारका जो भगवान श्री कृष्ण का घर है उसकी मुलाकात आपको जरूर लेनी चाहिए। द्वारका के ऊपर मैंने एक अलग से लेख लिखा है जिसे आप जरूर पढ़िए। जुनागढ़ से द्वारका सिर्फ 209 किलोमीटर दूर है।
सौराष्ट्र में गए हो और सोमनाथ में महादेव के दर्शन नहीं किए तो आपकी यह यात्रा अधूरी ही रहेंगी। जुनागढ़ से सोमनाथ सिर्फ 91 किलोमीटर दूर है।
सोमनाथ से आप दीव घूमने के लिए जा सकते हैं जो सोमनाथ से 85 किलोमीटर और जुनागढ़ से 175 किलोमीटर दूर है।
तो इस तरह से जुनागढ़ के बेस्ट प्लेसेज, कहा ठहरे, जूनागढ़ से नजदीकी डेस्टिनेशन आदि जानकारी मैंने इस लेख में मेरे नॉलेज के अनुसार कवर किए हैं। आशा करता हूं यह जानकारी आपको पसंद आई होगी।







